बालकाण्ड · दोहा 116 · दोहा/सोरठा
पुरुष प्रसिद्ध प्रकास निधि प्रगट परावर नाथ।।
पुरुष प्रसिद्ध प्रकास निधि प्रगट परावर नाथ।।
रघुकुलमनि मम स्वामि सोइ कहि सिवँ नायउ माथ।।116।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.116 · पुस्तक पृ. 128, 129
भावार्थ और शब्दार्थ
1पुरुष प्रसिद्ध प्रकास निधि प्रगट परावर नाथ।।
वे विख्यात परम पुरुष, प्रकाश के भंडार और प्रकट रूप में पर तथा अपर—समस्त जगत—के स्वामी हैं।
English explanation
He is the renowned supreme person, the treasury of light, manifest as the Lord of all that is higher and lower.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुरुष | परम पुरुष | the supreme person |
| प्रसिद्ध | विख्यात | renowned |
| प्रकास | प्रकाश का | of light |
| निधि | भंडार | treasury |
| प्रगट | प्रकट | manifest |
| परावर | पर और अपर; उच्च और निम्न सबके | of the higher and lower; of all |
| नाथ | स्वामी | Lord |
2 रघुकुलमनि मम स्वामि सोइ कहि सिवँ नायउ माथ।।116।।
‘रघुकुल के रत्न वही मेरे स्वामी हैं’—यह कहकर शिव ने सिर झुकाया।
English explanation
‘That very jewel of Raghu’s lineage is my Lord,’ said Shiva, bowing his head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुकुलमनि | रघुवंश के रत्न राम | Rama, the jewel of Raghu’s lineage |
| मम | मेरे | my |
| स्वामि | स्वामी | Lord |
| सोइ | वही | that very one |
| कहि | कहकर | having said |
| सिवँ | शिव ने | Shiva |
| नायउ | झुकाया | bowed |
| माथ | सिर | his head |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 116
- स्रोत अभिलेख
- 1.116
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 128, 129
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