बालकाण्ड · दोहा 30 (क) · दोहा/सोरठा
मै पुनि निज गुर सन सुनी कथा सो सूकरखेत।
मै पुनि निज गुर सन सुनी कथा सो सूकरखेत।
समुझी नहि तसि बालपन तब अति रहेउँ अचेत।।30(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.3 · पुस्तक पृ. 52, 52
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1मै पुनि निज गुर सन सुनी कथा सो सूकरखेत।
मैंने भी वही कथा सूकरखेत में अपने गुरु से सुनी।
English explanation
I too heard that same story from my own teacher at Sukarkhet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मै | मैंने | I |
| पुनि | भी, फिर | also, in turn |
| निज | अपने | my own |
| गुर | गुरु | teacher |
| सन | से | from |
| सुनी | सुनी | heard |
| कथा | कथा | story |
| सो | वही | that same |
| सूकरखेत | सूकरखेत नामक स्थान में | at the place called Sukarkhet |
2 समुझी नहि तसि बालपन तब अति रहेउँ अचेत।।30(क)।।
पर उसे उस प्रकार समझ नहीं पाया; बचपन में तब मैं बहुत नासमझ था।
English explanation
But I did not understand it properly; in childhood I was then very uncomprehending.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझी | समझी, समझ पाया | understood |
| नहि | नहीं | not |
| तसि | वैसी, उस प्रकार | in that way, properly |
| बालपन | बचपन में | in childhood |
| तब | उस समय | then |
| अति | बहुत | very |
| रहेउँ | मैं था | I was |
| अचेत | नासमझ, अबोध | uncomprehending, immature |
| क | पद्य-संदर्भ का उपखंड-सूचक ‘क’ | verse-reference subdivision marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 30 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 1.3
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 52, 52
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।