बालकाण्ड · दोहा 29 (ग) · दोहा/सोरठा
एहि बिधि निज गुन दोष कहि सबहि बहुरि सिरु नाइ।
एहि बिधि निज गुन दोष कहि सबहि बहुरि सिरु नाइ।
बरनउँ रघुबर बिसद जसु सुनि कलि कलुष नसाइ।।29(ग)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.29 · पुस्तक पृ. 50, 51
भावार्थ और शब्दार्थ
1 एहि बिधि निज गुन दोष कहि सबहि बहुरि सिरु नाइ।
इस प्रकार अपने गुण और दोष कहकर, फिर सबको सिर नवाकर—
English explanation
Having thus stated my own virtues and faults, and again bowed my head to everyone—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| निज | अपने | my own |
| गुन | गुण | virtues |
| दोष | दोष | faults |
| कहि | कहकर | having stated |
| सबहि | सबको | to everyone |
| बहुरि | फिर | again |
| सिरु | सिर | head |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
2 बरनउँ रघुबर बिसद जसु सुनि कलि कलुष नसाइ।।29(ग)।।
मैं रघुश्रेष्ठ राम के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जिसे सुनने से कलियुग का कलुष मिट जाता है।
English explanation
I recount the spotless glory of Rama, foremost of Raghu's line; hearing it dispels the impurity of the Kali age.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरनउँ | मैं वर्णन करता हूँ | I recount |
| रघुबर | रघुवंश में श्रेष्ठ राम का | of Rama, foremost of Raghu's line |
| बिसद | निर्मल | spotless |
| जसु | यश | glory |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| कलि | कलियुग का | of the Kali age |
| कलुष | कलुष | impurity |
| नसाइ | मिट जाता है | is dispelled |
| ग | पद्य-संदर्भ का उपखंड ‘ग’ | verse-reference subdivision marker |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 29 (ग)
- स्रोत अभिलेख
- 1.29
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 50, 51
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।