बालकाण्ड · दोहा 100 · दोहा
मुनि अनुसासन गनपतिहि पूजेउ संभु भवानि।
मुनि अनुसासन गनपतिहि पूजेउ संभु भवानि।
कोउ सुनि संसय करै जनि सुर अनादि जियँ जानि॥ १००॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.1 · पुस्तक पृ. 114, 114
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1मुनि अनुसासन गनपतिहि पूजेउ संभु भवानि।
मुनि के निर्देश के अनुसार शिव और भवानी ने गणपति की पूजा की।
English explanation
Following the sage’s instructions, Shiva and Bhavani worshipped Ganesha.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि के | of the sage |
| अनुसासन | निर्देश के अनुसार | according to the instructions |
| गनपतिहि | गणपति को | Ganesha |
| पूजेउ | पूजा की | worshipped |
| संभु | शंभु; शिव | Shambhu, Shiva |
| भवानि | भवानी; पार्वती | Bhavani, Parvati |
2कोउ सुनि संसय करै जनि सुर अनादि जियँ जानि॥ १००॥
यह सुनकर कोई संदेह न करे; मन में जान ले कि देवता अनादि हैं।
English explanation
Let no one doubt on hearing this; understand in your heart that the gods are without beginning.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोउ | कोई | anyone |
| सुनि | सुनकर | on hearing this |
| संसय | संदेह | doubt |
| करै | करे | should entertain |
| जनि | मत; न | do not |
| सुर | देवता | the gods |
| अनादि | जिनका कोई आरंभ नहीं | without beginning |
| जियँ | मन में | in your heart |
| जानि | जानकर; समझ लो | recognizing; understand |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 100
- स्रोत अभिलेख
- 1.1
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 114, 114
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।