बालकाण्ड · दोहा 101 · दोहा
नाथ उमा मम प्रान सम गृहकिंकरी करेहु।
नाथ उमा मम प्रान सम गृहकिंकरी करेहु।
छमेहु सकल अपराध अब होइ प्रसन्न बरु देहु॥ १०१॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.101 · पुस्तक पृ. 115, 115
भावार्थ और शब्दार्थ
1नाथ उमा मम प्रान सम गृहकिंकरी करेहु।
एआई-प्रारूप अर्थ: ‘हे नाथ, उमा मुझे अपने प्राणों के समान प्रिय है; उसे अपने घर की सेविका बना लीजिए।’
English explanation
AI-draft meaning: ‘O Lord, Uma is as dear to me as my own life; accept her as a servant of your household.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| उमा | उमा, पार्वती | Uma, Parvati |
| मम | मेरे | my |
| प्रान | प्राण | life |
| सम | के समान | as dear as |
| गृहकिंकरी | घर की सेविका | household servant |
| करेहु | बना लीजिए | please make her |
2छमेहु सकल अपराध अब होइ प्रसन्न बरु देहु॥ १०१॥
एआई-प्रारूप अर्थ: ‘उसके सभी अपराध क्षमा कीजिए और अब प्रसन्न होकर यह वर दीजिए।’
English explanation
AI-draft meaning: ‘Forgive all her offenses, and now, being pleased, grant this boon.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छमेहु | क्षमा कीजिए | please forgive |
| सकल | सभी | all |
| अपराध | अपराधों को | offenses |
| अब | अब | now |
| होइ | होकर | being |
| प्रसन्न | प्रसन्न | pleased |
| बरु | वरदान | boon |
| देहु | दीजिए | please grant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 101
- स्रोत अभिलेख
- 1.101
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 115, 115
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।