बालकाण्ड · दोहा 102 · दोहा
चले संग हिमवंतु तब पहुँचावन अति हेतु।
चले संग हिमवंतु तब पहुँचावन अति हेतु।
बिबिध भाँति परितोषु करि बिदा कीन्ह बृषकेतु॥ १०२॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.102 · पुस्तक पृ. 116, 116
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1चले संग हिमवंतु तब पहुँचावन अति हेतु।
तब हिमवान अत्यंत स्नेह से उन्हें विदा करने के लिए साथ चले।
English explanation
Then Himavan accompanied them to see them off, out of deep affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चले | went |
| संग | साथ | along with them |
| हिमवंतु | हिमवान, पार्वती के पिता | Himavan, Parvati's father |
| तब | तब | then |
| पहुँचावन | विदाई में कुछ दूर पहुँचाने के लिए | to accompany them on their departure |
| अति | अत्यंत | deep; great |
| हेतु | स्नेह से | out of affection |
2बिबिध भाँति परितोषु करि बिदा कीन्ह बृषकेतु॥ १०२॥
वृषकेतु शिव ने हिमवान को अनेक प्रकार से संतुष्ट करके विदा किया।
English explanation
Shiva, whose banner bears a bull, reassured Himavan in various ways and bade him farewell.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिबिध | अनेक | various |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| परितोषु | संतोष | satisfaction; reassurance |
| करि | करके | having given |
| बिदा | विदा | farewell |
| कीन्ह | किया | bade; sent off |
| बृषकेतु | वृषभ-ध्वज वाले शिव | Shiva, whose banner bears a bull |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 102
- स्रोत अभिलेख
- 1.102
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 116, 116
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