बालकाण्ड · दोहा 103 · दोहा
चरित सिं धु गिरिजा रमन बेद न पावहिं पारु।
चरित सिं धु गिरिजा रमन बेद न पावहिं पारु।
बरनै तुलसीदासु किमि अति मतिमंद गवाँरु॥ १०३॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.103 · पुस्तक पृ. 117, 118
भावार्थ और शब्दार्थ
1चरित सिं धु गिरिजा रमन बेद न पावहिं पारु।
गिरिजा के पति शिव के चरित्र-सागर का पार वेद भी नहीं पाते। (‘सिं धु’ को संभावित खंडित ‘सिंधु’ मानकर अर्थ किया गया है।)
English explanation
Even the Vedas cannot reach the far shore of the ocean of the deeds of Shiva, Girija’s husband. (This reads ‘सिं धु’ as a likely fragmented ‘सिंधु’, meaning ocean.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चरित | जीवन और कर्मों का वृत्तांत | account of life and deeds |
| सिं | सागर—संयुक्त शब्द ‘सिंधु’ का पहला अंश। | Ocean—as the first fragment of ‘सिंधु’. |
| धु | सागर—संयुक्त शब्द ‘सिंधु’ का दूसरा अंश। | Ocean—as the second fragment of ‘सिंधु’. |
| गिरिजा | पर्वतपुत्री पार्वती के | of Parvati, daughter of the mountain |
| रमन | पति शिव | husband, Shiva |
| बेद | वेद | the Vedas |
| न | नहीं | not |
| पावहिं | पहुँच पाते हैं | can reach |
| पारु | पार या अंतिम सीमा | the far shore or limit |
2बरनै तुलसीदासु किमि अति मतिमंद गवाँरु॥ १०३॥
तो अत्यंत मंदबुद्धि और गँवार तुलसीदास उसका वर्णन कैसे कर सकते हैं?
English explanation
How, then, can Tulsidas, describing himself as exceedingly dull-witted and unlearned, recount it?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरनै | वर्णन करें | recount |
| तुलसीदासु | कवि तुलसीदास | Tulsidas, the poet |
| किमि | कैसे | how |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| मतिमंद | मंद बुद्धि वाले | dull-witted |
| गवाँरु | गँवार या अशिक्षित | rustic or unlearned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 103
- स्रोत अभिलेख
- 1.103
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 117, 118
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।