बालकाण्ड · दोहा 104 · दोहा/सोरठा
प्रथमहिं मै कहि सिव चरित बूझा मरमु तुम्हार।
प्रथमहिं मै कहि सिव चरित बूझा मरमु तुम्हार।
सुचि सेवक तुम्ह राम के रहित समस्त बिकार।।104।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.104 · पुस्तक पृ. 118, 119
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1प्रथमहिं मै कहि सिव चरित बूझा मरमु तुम्हार।
मैंने आरंभ में ही शिव का चरित्र सुनाकर तुम्हारे हृदय का भाव समझ लिया।
English explanation
By first recounting Shiva’s story, I understood your innermost disposition.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रथमहिं | आरंभ में ही | at the very outset |
| मै | मैंने | I |
| कहि | कहकर; सुनाकर | having recounted |
| सिव | शिव का | Shiva’s |
| चरित | चरित्र; कथा | story; deeds |
| बूझा | समझ लिया | understood |
| मरमु | हृदय का गूढ़ भाव | innermost disposition |
| तुम्हार | तुम्हारा | your |
2 सुचि सेवक तुम्ह राम के रहित समस्त बिकार।।104।।
तुम राम के पवित्र सेवक हो, सभी विकारों से रहित।
English explanation
You are a pure servant of Rama, free from all inner defects.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुचि | पवित्र; निर्मल | pure |
| सेवक | सेवक | servant |
| तुम्ह | तुम | you |
| राम | राम | Rama |
| के | के | of |
| रहित | से रहित | free from |
| समस्त | सभी | all |
| बिकार | मनोविकार; आंतरिक दोष | inner defects; impurities |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 104
- स्रोत अभिलेख
- 1.104
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 118, 119
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।