बालकाण्ड · दोहा 359 · दोहा/सोरठा
मंगल मोद उछाह नित जाहिं दिवस एहि भाँति।
मंगल मोद उछाह नित जाहिं दिवस एहि भाँति।
उमगी अवध अनंद भरि अधिक अधिक अधिकाति।।359।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.359 · पुस्तक पृ. 338, 339
भावार्थ और शब्दार्थ
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1मंगल मोद उछाह नित जाहिं दिवस एहि भाँति।
इस प्रकार प्रतिदिन मंगल, आनंद और उत्साह में दिन बीतते हैं।
English explanation
Thus the days pass continually amid auspicious celebration, joy, and enthusiasm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंगल | मंगल-उत्सव | auspicious celebration |
| मोद | आनंद | joy |
| उछाह | उत्साह | enthusiasm |
| नित | नित्य | continually |
| जाहिं | बीतते हैं | pass |
| दिवस | दिन | days |
| एहि | इस | this |
| भाँति | प्रकार | manner |
2 उमगी अवध अनंद भरि अधिक अधिक अधिकाति।।359।।
आनंद से भरी अयोध्या उमंग उठी; उसका आनंद अधिकाधिक बढ़ता जाता है।
English explanation
Filled with joy, Ayodhya surged with delight; its joy keeps increasing more and more.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उमगी | उमंग उठी | surged with delight |
| अवध | अयोध्या नगरी | the city of Ayodhya |
| अनंद | आनंद से | with joy |
| भरि | भरकर | filled |
| अधिक | और अधिक | more |
| अधिक | और भी अधिक | and still more |
| अधिकाति | बढ़ती जाती है | keeps increasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 359
- स्रोत अभिलेख
- 1.359
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 338, 339
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