बालकाण्ड · दोहा 174 · दोहा/सोरठा
भूपति भावी मिटइ नहिं जदपि न दूषन तोर।
भूपति भावी मिटइ नहिं जदपि न दूषन तोर।
किएँ अन्यथा होइ नहिं बिप्रश्राप अति घोर।।174।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.174 · पुस्तक पृ. 175, 176
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भूपति भावी मिटइ नहिं जदपि न दूषन तोर।
हे राजा! यद्यपि तेरा कोई दोष नहीं है, फिर भी होनहार मिटती नहीं।
English explanation
O king, although you are not at fault, what is destined cannot be erased.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूपति | हे राजा | O king |
| भावी | होनहार; नियत घटना | what is destined |
| मिटइ | मिटती है | is erased |
| नहिं | नहीं | not |
| जदपि | यद्यपि | although |
| न | नहीं | no |
| दूषन | दोष | fault |
| तोर | तेरा | yours |
2 किएँ अन्यथा होइ नहिं बिप्रश्राप अति घोर।।174।।
उसे बदलने का प्रयास करने पर भी वह बदल नहीं सकती; ब्राह्मणों का शाप अत्यंत भयंकर है।
English explanation
Even an effort to alter it cannot change it; the Brahmins’ curse is exceedingly terrible.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| किएँ | करने पर भी | even by attempting |
| अन्यथा | भिन्न; बदला हुआ | otherwise; altered |
| होइ | होता है | becomes |
| नहिं | नहीं | not |
| बिप्रश्राप | ब्राह्मणों का शाप | the Brahmins’ curse |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| घोर | भयंकर | terrible |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 174
- स्रोत अभिलेख
- 1.174
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 175, 176
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।