बालकाण्ड · दोहा 173 · दोहा/सोरठा
बोले बिप्र सकोप तब नहिं कछु कीन्ह बिचार।
बोले बिप्र सकोप तब नहिं कछु कीन्ह बिचार।
जाइ निसाचर होहु नृप मूढ़ सहित परिवार।।173।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.173 · पुस्तक पृ. 175, 175
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1बोले बिप्र सकोप तब नहिं कछु कीन्ह बिचार।
तब ब्राह्मण क्रोध से बोले; उन्होंने कुछ भी विचार नहीं किया।
English explanation
Then the Brahmins spoke angrily, without giving the matter any consideration.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोले | बोले | spoke |
| बिप्र | ब्राह्मण | the Brahmins |
| सकोप | क्रोध सहित | angrily |
| तब | तब | then |
| नहिं | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | any |
| कीन्ह | किया | gave; undertook |
| बिचार | विचार | consideration |
2 जाइ निसाचर होहु नृप मूढ़ सहित परिवार।।173।।
हे मूर्ख राजा, जा, अपने परिवार सहित राक्षस हो जा!
English explanation
Go, foolish king, become a demon together with your family!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाइ | जाकर; जा | go; going forth |
| निसाचर | राक्षस | a demon |
| होहु | हो जा | become |
| नृप | हे राजा | O king |
| मूढ़ | मूर्ख | foolish |
| सहित | के साथ | together with |
| परिवार | परिवार | your family |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 173
- स्रोत अभिलेख
- 1.173
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 175, 175
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