बालकाण्ड · दोहा 175 · दोहा/सोरठा
भरद्वाज सुनु जाहि जब होइ बिधाता बाम।
भरद्वाज सुनु जाहि जब होइ बिधाता बाम।
धूरि मेरुसम जनक जम ताहि ब्यालसम दाम।।।175।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.175 · पुस्तक पृ. 176, 177
भावार्थ और शब्दार्थ
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1भरद्वाज सुनु जाहि जब होइ बिधाता बाम।
हे भरद्वाज, सुनो! जब विधाता किसी के प्रतिकूल हो जाता है—
English explanation
Listen, Bharadvaja! When the disposer of fate turns against someone—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरद्वाज | हे ऋषि भरद्वाज | O sage Bharadvaja |
| सुनु | सुनो | listen |
| जाहि | जिसके लिए | for whom |
| जब | जब | when |
| होइ | हो जाता है | becomes |
| बिधाता | विधाता | the disposer of fate |
| बाम | प्रतिकूल | adverse |
2 धूरि मेरुसम जनक जम ताहि ब्यालसम दाम।।।175।।
उसके लिए धूल मेरु पर्वत के समान, पिता यम के समान और रस्सी साँप के समान हो जाती है।
English explanation
For that person, dust becomes like Mount Meru, a father like Death, and a rope like a snake.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धूरि | धूल | dust |
| मेरुसम | मेरु पर्वत के समान | like Mount Meru |
| जनक | पिता | a father |
| जम | यम के समान | like Yama, the god of death |
| ताहि | उसके लिए | for that person |
| ब्यालसम | साँप के समान | like a snake |
| दाम | रस्सी | a rope |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 175
- स्रोत अभिलेख
- 1.175
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 176, 177
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