बालकाण्ड · दोहा 182 (क) · दोहा/सोरठा
भुजबल बिस्व बस्य करि राखेसि कोउ न सुतंत्र।
भुजबल बिस्व बस्य करि राखेसि कोउ न सुतंत्र।
मंडलीक मनि रावन राज करइ निज मंत्र।।182(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.182 · पुस्तक पृ. 182, 183
भावार्थ और शब्दार्थ
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1भुजबल बिस्व बस्य करि राखेसि कोउ न सुतंत्र।
अपने बाहुबल से उसने संसार को वश में कर रखा था; कोई स्वतंत्र नहीं था।
English explanation
By the strength of his arms he kept the world subdued; no one was independent.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भुजबल | भुजाओं के बल से | by the strength of his arms |
| बिस्व | संसार को | the world |
| बस्य | वश में; अधीन | subdued; subject |
| करि | करके | having made |
| राखेसि | उसने रख छोड़ा था | he kept |
| कोउ | कोई भी | anyone |
| न | नहीं | not |
| सुतंत्र | स्वतंत्र | independent; free |
2 मंडलीक मनि रावन राज करइ निज मंत्र।।182(क)।।
राजाओं में शिरोमणि रावण अपनी ही नीति और सलाह के अनुसार राज्य करता था।
English explanation
Ravana, the foremost among kings, ruled according to his own counsel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंडलीक | मंडलों के शासकों; राजाओं में | among regional rulers; kings |
| मनि | मणि; शिरोमणि | the jewel; foremost one |
| रावन | रावण | Ravana, the demon king |
| राज | राज्य; शासन | rule; kingship |
| करइ | करता है | exercises; conducts |
| निज | अपनी ही | his own |
| मंत्र | सलाह; नीति | counsel; policy |
| क | पद-संदर्भ चिह्न ‘क’ | verse reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 182 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 1.182
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 182, 183
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