बालकाण्ड · दोहा 182 (ख) · दोहा/सोरठा
देव जच्छ गंधर्व नर किंनर नाग कुमारि।
देव जच्छ गंधर्व नर किंनर नाग कुमारि।
जीति बरीं निज बाहुबल बहु सुंदर बर नारि।।182ख।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.182 · पुस्तक पृ. 182, 183
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 देव जच्छ गंधर्व नर किंनर नाग कुमारि।
देवताओं, यक्षों, गंधर्वों, मनुष्यों, किन्नरों और नागों की कन्याएँ—
English explanation
Daughters of gods, yakshas, celestial musicians, humans, kinnara beings, and serpent beings—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देव | देवताओं की | of the gods |
| जच्छ | यक्षों की; दिव्य प्राणियों की | of yakshas, supernatural beings |
| गंधर्व | गंधर्वों की; दिव्य संगीतज्ञों की | of gandharvas, celestial musicians |
| नर | मनुष्यों की | of humans |
| किंनर | किन्नर दिव्य प्राणियों की | of celestial kinnara beings |
| नाग | नाग जाति की | of serpent beings |
| कुमारि | कन्याएँ | daughters; maidens |
2 जीति बरीं निज बाहुबल बहु सुंदर बर नारि।।182ख।।
अपने बाहुबल से जीतकर उसने ऐसी अनेक सुंदर, उत्तम स्त्रियों को पत्नी बनाया।
English explanation
Having conquered by his own strength of arms, he took many such beautiful, fine women as wives.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जीति | जीतकर | having conquered |
| बरीं | विवाह किया; पत्नी बनाया | married; took as wives |
| निज | अपने | his own |
| बाहुबल | भुजाओं के बल से | by strength of arms |
| बहु | अनेक | many |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| बर | उत्तम; श्रेष्ठ | fine; excellent |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| ख | पद-संदर्भ चिह्न ‘ख’ | verse reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 182 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 1.182
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 182, 183
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