बालकाण्ड · दोहा 9 · दोहा/सोरठा
भनिति मोरि सब गुन रहित बिस्व बिदित गुन एक।
भनिति मोरि सब गुन रहित बिस्व बिदित गुन एक।
सो बिचारि सुनिहहिं सुमति जिन्ह कें बिमल बिवेक।।9।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.9 · पुस्तक पृ. 29, 30
भावार्थ और शब्दार्थ
1भनिति मोरि सब गुन रहित बिस्व बिदित गुन एक।
मेरी काव्य-रचना सभी गुणों से रहित है, पर उसमें एक गुण है जो संसार में प्रसिद्ध है।
English explanation
My poetic composition lacks all merits, yet it has one merit known throughout the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भनिति | काव्य-रचना | poetic composition |
| मोरि | मेरी | my |
| सब | सभी | all |
| गुन | गुणों से | merits |
| रहित | रहित | devoid of |
| बिस्व | संसार में | throughout the world |
| बिदित | प्रसिद्ध | known |
| गुन | गुण | merit |
| एक | एक | one |
2 सो बिचारि सुनिहहिं सुमति जिन्ह कें बिमल बिवेक।।9।।
उसी गुण पर विचार करके वे सुबुद्धि लोग इसे सुनेंगे जिनका विवेक निर्मल है।
English explanation
Considering that merit, people of sound understanding whose discernment is pure will listen to it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | उस गुण को | that merit |
| बिचारि | विचारकर | considering |
| सुनिहहिं | सुनेंगे | will listen |
| सुमति | सुबुद्धि लोग | people of sound understanding |
| जिन्ह | जिन लोगों | those whose |
| कें | का | possessive marker |
| बिमल | निर्मल | pure |
| बिवेक | विवेक | discernment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 9
- स्रोत अभिलेख
- 1.9
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 29, 30
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।