बालकाण्ड · दोहा 10 (क) · दोहा
प्रिय लागिहि अति सबहि मम भनिति राम जस संग।
प्रिय लागिहि अति सबहि मम भनिति राम जस संग।
दारु बिचारु कि करइ कोउ बंदिअ मलय प्रसंग॥ १० (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.1 · पुस्तक पृ. 30, 31
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1प्रिय लागिहि अति सबहि मम भनिति राम जस संग।
राम के यश के साथ जुड़ी होने से मेरी कविता सभी को अत्यंत प्रिय लगेगी।
English explanation
Through its association with Rama’s glory, my poetry will be very dear to everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रिय | प्रिय; अच्छी | dear; pleasing |
| लागिहि | लगेगी | will seem; will be felt to be |
| अति | अत्यंत | very; exceedingly |
| सबहि | सभी को | to everyone |
| मम | मेरी | my |
| भनिति | कविता; काव्य-रचना | poetry; poetic composition |
| राम | श्रीराम | Lord Rama |
| जस | यश; कीर्ति | glory; renown |
| संग | के संग; के संबंध से | through association with |
2दारु बिचारु कि करइ कोउ बंदिअ मलय प्रसंग॥ १० (क)॥
मलय पर्वत के संसर्ग से वंदनीय हुई लकड़ी की मूल जाति पर क्या कोई विचार करता है?
English explanation
Does anyone question the original kind of wood when association with Mount Malaya has made it worthy of reverence?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दारु | लकड़ी; काष्ठ | wood; timber |
| बिचारु | विचार; मूल प्रकार की जाँच | consideration; scrutiny of its original kind |
| कि | क्या | does; a question marker |
| करइ | करता है | does; makes |
| कोउ | कोई | anyone |
| बंदिअ | वंदनीय होती है; आदर किया जाता है | is revered; is worthy of reverence |
| मलय | चंदन के लिए प्रसिद्ध मलय पर्वत | Mount Malaya, famed for sandalwood |
| प्रसंग | संसर्ग से; संपर्क के कारण | through association; through contact |
| क | पद-संदर्भ चिह्न ‘क’ | verse-reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 10 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 1.1
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 30, 31
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।