बालकाण्ड · दोहा 44 · दोहा/सोरठा
ब्रह्म निरूपम धरम बिधि बरनहिं तत्त्व बिभाग।
ब्रह्म निरूपम धरम बिधि बरनहिं तत्त्व बिभाग।
कहहिं भगति भगवंत कै संजुत ग्यान बिराग।।44।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.44 · पुस्तक पृ. 66, 67
भावार्थ और शब्दार्थ
1ब्रह्म निरूपम धरम बिधि बरनहिं तत्त्व बिभाग।
पाठगत अनिश्चितता के साथ: वे ब्रह्म का विवेचन, धर्म की विधियाँ और तत्त्वों के भेद बताते हैं।
English explanation
With a textual uncertainty: They expound Brahman, the ways of religious duty, and the distinctions among fundamental principles.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्म | परम सत्य ब्रह्म का | of Brahman, ultimate reality |
| निरूपम | विवेचन | exposition |
| धरम | धर्म की | of religious duty |
| बिधि | विधियाँ | methods and observances |
| बरनहिं | वर्णन करते हैं | describe |
| तत्त्व | मूल तत्त्वों के | of fundamental principles |
| बिभाग | भेद और वर्गीकरण | distinctions and divisions |
2 कहहिं भगति भगवंत कै संजुत ग्यान बिराग।।44।।
वे ज्ञान और वैराग्य से युक्त भगवान की भक्ति का वर्णन करते हैं।
English explanation
They describe devotion to the Lord accompanied by spiritual knowledge and detachment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहिं | वर्णन करते हैं | describe |
| भगति | भक्ति | devotion |
| भगवंत | भगवान | the Lord |
| कै | की | to |
| संजुत | से युक्त | accompanied by |
| ग्यान | आध्यात्मिक ज्ञान | spiritual knowledge |
| बिराग | वैराग्य | detachment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 44
- स्रोत अभिलेख
- 1.44
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 66, 67
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।