बालकाण्ड · दोहा 124 (क) · दोहा/सोरठा
बोले बिहसि महेस तब ग्यानी मूढ़ न कोइ।
बोले बिहसि महेस तब ग्यानी मूढ़ न कोइ।
जेहि जस रघुपति करहिं जब सो तस तेहि छन होइ।।124(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.124 · पुस्तक पृ. 135, 136
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 बोले बिहसि महेस तब ग्यानी मूढ़ न कोइ।
तब शिव मुसकराकर बोले: कोई अपने आप में न ज्ञानी है, न मूर्ख।
English explanation
Then Shiva smiled and said: no one is wise or foolish in their own right.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोले | बोले | said |
| बिहसि | मुसकराकर | with a smile |
| महेस | महेश, शिव | Shiva, the great Lord |
| तब | तब | then |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
| मूढ़ | मूर्ख | foolish |
| न | नहीं | not |
| कोइ | कोई | anyone |
2 जेहि जस रघुपति करहिं जब सो तस तेहि छन होइ।।124(क)।।
रघुपति जब जिसे जैसा करते हैं, वह उसी क्षण वैसा हो जाता है।
English explanation
Whenever Rama makes someone a certain way, that person becomes so at that very moment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिसे | whomever |
| जस | जैसा | in whatever manner |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| करहिं | करते हैं | make |
| जब | जब | when |
| सो | वह | that person |
| तस | वैसा | that way |
| तेहि | उसी | that very |
| छन | क्षण | moment |
| होइ | हो जाता है | becomes |
| क | पद्य-संदर्भ का चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 124 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 1.124
- सहायक विषय
- अवतारके हेतु
- मुद्रित पृष्ठ
- 135, 136
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