बालकाण्ड · दोहा 123 · दोहा/सोरठा
छल करि टारेउ तासु ब्रत प्रभु सुर कारज कीन्ह।।
छल करि टारेउ तासु ब्रत प्रभु सुर कारज कीन्ह।।
जब तेहि जानेउ मरम तब श्राप कोप करि दीन्ह।।123।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.123 · पुस्तक पृ. 134, 135
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1छल करि टारेउ तासु ब्रत प्रभु सुर कारज कीन्ह।।
प्रभु ने छल करके उसका पतिव्रत भंग किया और देवताओं का कार्य पूरा किया।
English explanation
The Lord used deception to break her vow of fidelity and accomplished the gods’ purpose.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छल | छल | deception |
| करि | करके | using |
| टारेउ | भंग किया | broke |
| तासु | उस असुर की पत्नी का | of the demon’s wife |
| ब्रत | पतिव्रत | vow of marital fidelity |
| प्रभु | प्रभु विष्णु | the Lord Vishnu |
| सुर | देवताओं का | the gods’ |
| कारज | कार्य | purpose |
| कीन्ह | पूरा किया | accomplished |
2 जब तेहि जानेउ मरम तब श्राप कोप करि दीन्ह।।123।।
जब उसने वास्तविक रहस्य जान लिया, तब क्रोध करके प्रभु को शाप दिया।
English explanation
When she discovered what had really happened, she angrily cursed the Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| तेहि | उस असुर की पत्नी ने | the demon’s wife |
| जानेउ | जान लिया | discovered |
| मरम | छल का वास्तविक रहस्य | the truth of the deception |
| तब | तब | then |
| श्राप | शाप | a curse |
| कोप | क्रोध | anger |
| करि | करके | having become |
| दीन्ह | दिया | pronounced |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 123
- स्रोत अभिलेख
- 1.123
- सहायक विषय
- अवतारके हेतु
- मुद्रित पृष्ठ
- 134, 135
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