बालकाण्ड · दोहा 124 (ख) · दोहा/सोरठा
कहउँ राम गुन गाथ भरद्वाज सादर सुनहु।
कहउँ राम गुन गाथ भरद्वाज सादर सुनहु।
भव भंजन रघुनाथ भजु तुलसी तजि मान मद।।124(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.124 · पुस्तक पृ. 135, 136
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 कहउँ राम गुन गाथ भरद्वाज सादर सुनहु।
हे भरद्वाज, मैं राम के गुणों की गाथा कहता हूँ; आदरपूर्वक सुनिए।
English explanation
O Bharadvaja, I recount the tale of Rama’s virtues; listen with reverence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I recount |
| राम | भगवान राम के | Lord Rama’s |
| गुन | गुणों की | of virtues |
| गाथ | गाथा | tale |
| भरद्वाज | हे मुनि भरद्वाज | O sage Bharadvaja |
| सादर | आदरपूर्वक | with reverence |
| सुनहु | सुनिए | listen |
2 भव भंजन रघुनाथ भजु तुलसी तजि मान मद।।124(ख)।।
हे तुलसी, अभिमान और मद छोड़कर संसार-बंधन का नाश करने वाले रघुनाथ का भजन करो।
English explanation
O Tulsi, abandon pride and conceit and worship Rama, who destroys the bondage of worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भव | संसार-बंधन | bondage of worldly existence |
| भंजन | नाश करने वाले | destroyer of |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| भजु | भजन करो | worship |
| तुलसी | हे तुलसीदास | O Tulsidas |
| तजि | छोड़कर | abandoning |
| मान | अभिमान | pride |
| मद | मद; अहंकार का नशा | conceit; intoxication of ego |
| ख | पद्य-संदर्भ का चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 124 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 1.124
- सहायक विषय
- अवतारके हेतु
- मुद्रित पृष्ठ
- 135, 136
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