बालकाण्ड · दोहा 125 · दोहा/सोरठा
सुख हाड़ लै भाग सठ स्वान निरखि मृगराज।
सुख हाड़ लै भाग सठ स्वान निरखि मृगराज।
छीनि लेइ जनि जान जड़ तिमि सुरपतिहि न लाज।।125।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.125 · पुस्तक पृ. 136, 137
भावार्थ और शब्दार्थ
1सुख हाड़ लै भाग सठ स्वान निरखि मृगराज।
मूर्ख कुत्ता सिंह को देखकर सूखी हड्डी लेकर भागता है। (‘सुख’ का पाठ संदिग्ध है; यहाँ सूखी हड्डी का भाव लिया गया है।)
English explanation
Seeing a lion, a foolish dog runs away carrying a dry bone. (The supplied ‘सुख’ is uncertain; the contextual reading here is ‘dry.’)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुख | सूखी | dry |
| हाड़ | हड्डी | bone |
| लै | लेकर | taking |
| भाग | भागता है | runs away |
| सठ | मूर्ख | foolish |
| स्वान | कुत्ता | dog |
| निरखि | देखकर | seeing |
| मृगराज | सिंह, पशुओं का राजा | the lion, king of beasts |
2 छीनि लेइ जनि जान जड़ तिमि सुरपतिहि न लाज।।125।।
वह मूर्ख समझता है कि कहीं सिंह हड्डी छीन न ले; उसी तरह देवराज इंद्र को भी लज्जा नहीं आती।
English explanation
The foolish dog thinks the lion might snatch it away; likewise, Indra, lord of the gods, feels no shame.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छीनि | छीनकर | snatching |
| लेइ | ले ले | take away |
| जनि | कहीं न | lest |
| जान | समझता है | thinks |
| जड़ | मूर्ख कुत्ता | the foolish dog |
| तिमि | उसी तरह | likewise |
| सुरपतिहि | देवराज इंद्र को | to Indra, lord of the gods |
| न | नहीं | no |
| लाज | लज्जा | shame |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 125
- स्रोत अभिलेख
- 1.125
- सहायक विषय
- अवतारके हेतु
- मुद्रित पृष्ठ
- 136, 137
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।