बालकाण्ड · दोहा 126 · दोहा/सोरठा
सहित सहाय सभीत अति मानि हारि मन मैन।
सहित सहाय सभीत अति मानि हारि मन मैन।
गहेसि जाइ मुनि चरन तब कहि सुठि आरत बैन।।126।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.126 · पुस्तक पृ. 137, 138
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 सहित सहाय सभीत अति मानि हारि मन मैन।
कामदेव अपने सहायकों सहित अत्यंत भयभीत होकर मन में हार मान चुके थे।
English explanation
Kama, together with his helpers, was deeply frightened and had inwardly admitted defeat.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहित | साथ | together with |
| सहाय | सहायकों के | his helpers |
| सभीत | भयभीत | afraid |
| अति | अत्यंत | very |
| मानि | मानकर | having acknowledged |
| हारि | हार | defeat |
| मन | मन में | inwardly |
| मैन | कामदेव | Kama, the god of desire |
2 गहेसि जाइ मुनि चरन तब कहि सुठि आरत बैन।।126।।
तब कामदेव ने जाकर अत्यंत व्याकुल वचन कहते हुए मुनि नारद के चरण पकड़ लिए।
English explanation
Then Kama went and clasped the sage Narada’s feet, speaking deeply distressed words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गहेसि | उन्होंने पकड़ लिए | he clasped |
| जाइ | जाकर | having gone |
| मुनि | मुनि नारद के | of the sage Narada |
| चरन | चरण | feet |
| तब | तब | then |
| कहि | कहते हुए | speaking |
| सुठि | अत्यंत | deeply |
| आरत | व्याकुल | distressed |
| बैन | वचन | words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 126
- स्रोत अभिलेख
- 1.126
- सहायक विषय
- अवतारके हेतु
- मुद्रित पृष्ठ
- 137, 138
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