बालकाण्ड · दोहा 107 · दोहा/सोरठा
प्रभु समरथ सर्बग्य सिव सकल कला गुन धाम।।
प्रभु समरथ सर्बग्य सिव सकल कला गुन धाम।।
जोग ग्यान बैराग्य निधि प्रनत कलपतरु नाम।।107।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.107 · पुस्तक पृ. 121, 121
भावार्थ और शब्दार्थ
1प्रभु समरथ सर्बग्य सिव सकल कला गुन धाम।।
हे प्रभु शिव! आप समर्थ, सर्वज्ञ और समस्त कलाओं तथा गुणों के धाम हैं।
English explanation
Lord Shiva, you are all-capable, all-knowing, and the abode of every art and virtue.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | हे स्वामी | O Lord |
| समरथ | पूर्ण सामर्थ्य वाले | all-capable |
| सर्बग्य | सब कुछ जानने वाले | all-knowing |
| सिव | शिव | Shiva |
| सकल | समस्त | all |
| कला | कलाओं | arts and skills |
| गुन | गुणों के | virtues |
| धाम | धाम, आश्रय | abode |
2 जोग ग्यान बैराग्य निधि प्रनत कलपतरु नाम।।107।।
आप योग, ज्ञान और वैराग्य के भंडार हैं; आपका नाम शरणागतों के लिए कल्पवृक्ष है।
English explanation
You are the treasure-house of yoga, knowledge, and detachment; your name is a wish-fulfilling tree for those who take refuge in you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोग | योग के | yoga |
| ग्यान | ज्ञान के | knowledge |
| बैराग्य | वैराग्य के | detachment |
| निधि | भंडार | treasure-house |
| प्रनत | शरणागतों के लिए | for those who seek refuge |
| कलपतरु | मनोरथ पूर्ण करने वाला कल्पवृक्ष | a wish-fulfilling tree |
| नाम | आपका नाम | your name |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 107
- स्रोत अभिलेख
- 1.107
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 121, 121
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।