बालकाण्ड · दोहा 106 · दोहा/सोरठा
जटा मुकुट सुरसरित सिर लोचन नलिन बिसाल।
जटा मुकुट सुरसरित सिर लोचन नलिन बिसाल।
नीलकंठ लावन्यनिधि सोह बालबिधु भाल।।106।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.106 · पुस्तक पृ. 120, 120
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जटा मुकुट सुरसरित सिर लोचन नलिन बिसाल।
उनकी जटाएँ मुकुट बनी हैं, सिर पर गंगा हैं और नेत्र विशाल कमलों के समान हैं।
English explanation
His matted locks form a crown, the Ganges rests upon his head, and his eyes are like large lotuses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जटा | जटाओं का | of matted locks |
| मुकुट | मुकुट | crown |
| सुरसरित | देवनदी गंगा | the celestial river Ganges |
| सिर | सिर पर | on his head |
| लोचन | नेत्र | eyes |
| नलिन | कमल के समान | lotus-like |
| बिसाल | विशाल | large |
2 नीलकंठ लावन्यनिधि सोह बालबिधु भाल।।106।।
नीले कंठ वाले शिव सौंदर्य के भंडार हैं; उनके ललाट पर चंद्रकला शोभित है।
English explanation
Blue-throated Shiva is a treasure of beauty; a crescent moon adorns his forehead.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नीलकंठ | नीले कंठ वाले शिव | blue-throated Shiva |
| लावन्यनिधि | सौंदर्य के भंडार | treasure of beauty |
| सोह | शोभित है | shines, adorns |
| बालबिधु | चंद्रकला | crescent moon |
| भाल | ललाट पर | on the forehead |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 106
- स्रोत अभिलेख
- 1.106
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 120, 120
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