बालकाण्ड · दोहा 235 · दोहा/सोरठा
पतिदेवता सुतीय महुँ मातु प्रथम तव रेख।
पतिदेवता सुतीय महुँ मातु प्रथम तव रेख।
महिमा अमित न सकहिं कहि सहस सारदा सेष।।235।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.235 · पुस्तक पृ. 229, 230
भावार्थ और शब्दार्थ
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1पतिदेवता सुतीय महुँ मातु प्रथम तव रेख।
हे माता, पति को देवता मानने वाली साध्वी स्त्रियों में आपका स्थान प्रथम है।
English explanation
Mother, among virtuous women who regard their husbands as their deity, you stand foremost.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पतिदेवता | पति को देवता मानने वाली | regarding the husband as a deity |
| सुतीय | साध्वी स्त्रियों | virtuous women |
| महुँ | में | among |
| मातु | हे माता | O mother |
| प्रथम | सबसे पहला | foremost |
| तव | आपका | your |
| रेख | स्थान; श्रेणी | rank; place |
2 महिमा अमित न सकहिं कहि सहस सारदा सेष।।235।।
आपकी महिमा असीम है; हजारों सरस्वतियाँ और शेष भी उसे कह नहीं सकते।
English explanation
Your glory is boundless; even a thousand Saraswatis and Sheshas cannot describe it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महिमा | आपकी महिमा | your glory |
| अमित | असीम | boundless |
| न | नहीं | not |
| सकहिं | कह सकते हैं | can |
| कहि | वर्णन कर | describe |
| सहस | हजारों | a thousand |
| सारदा | वाणी की देवी सरस्वतियाँ | Saraswatis, goddesses of speech |
| सेष | शेषनाग | Sheshas, the many-headed serpent |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 235
- स्रोत अभिलेख
- 1.235
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 229, 230
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