बालकाण्ड · दोहा 234 · दोहा/सोरठा
देखन मिस मृग बिहग तरु फिरइ बहोरि बहोरि।
देखन मिस मृग बिहग तरु फिरइ बहोरि बहोरि।
निरखि निरखि रघुबीर छबि बाढ़इ प्रीति न थोरि।। 234।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.234 · पुस्तक पृ. 228, 229
भावार्थ और शब्दार्थ
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1देखन मिस मृग बिहग तरु फिरइ बहोरि बहोरि।
मृगों, पक्षियों और पेड़ों को देखने के बहाने सीता बार-बार मुड़कर देखती हैं।
English explanation
Under the pretext of looking at deer, birds, and trees, Sita turns back again and again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखन | देखने के | of looking at |
| मिस | बहाने | under the pretext |
| मृग | मृगों को | deer |
| बिहग | पक्षियों को | birds |
| तरु | पेड़ों को | trees |
| फिरइ | मुड़ती हैं | she turns back |
| बहोरि | फिर | again |
| बहोरि | फिर | and again |
2 निरखि निरखि रघुबीर छबि बाढ़इ प्रीति न थोरि।। 234।।
रघुवीर राम की छवि को बार-बार देखकर सीता का प्रेम बहुत बढ़ता जाता है।
English explanation
As Sita gazes repeatedly at the beauty of Rama, the hero of Raghu’s lineage, her love grows greatly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निरखि | देखकर | gazing |
| निरखि | बार-बार देखकर | again and again |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम की | of Rama, hero of Raghu’s lineage |
| छबि | सुंदर छवि | beautiful form |
| बाढ़इ | बढ़ती है | grows |
| प्रीति | प्रेम | love |
| न | नहीं | not |
| थोरि | थोड़ी; कम मात्रा में | a little |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 234
- स्रोत अभिलेख
- 1.234
- सहायक विषय
- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 228, 229
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