बालकाण्ड · दोहा 233 · दोहा/सोरठा
केहरि कटि पट पीत धर सुषमा सील निधान।
केहरि कटि पट पीत धर सुषमा सील निधान।
देखि भानुकुलभूषनहि बिसरा सखिन्ह अपान।।233।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.233 · पुस्तक पृ. 228, 228
भावार्थ और शब्दार्थ
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1केहरि कटि पट पीत धर सुषमा सील निधान।
उनकी कमर सिंह जैसी है, वे पीले वस्त्र धारण किए हुए हैं और सौंदर्य तथा शील के भंडार हैं।
English explanation
His waist is lion-like; he wears yellow garments and is a treasury of beauty and noble character.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| केहरि | सिंह जैसी | lion-like |
| कटि | कमर | waist |
| पट | वस्त्र | garments |
| पीत | पीले | yellow |
| धर | धारण करने वाले | wearing |
| सुषमा | सौंदर्य | beauty |
| सील | शील; सदाचार | noble character |
| निधान | भंडार | treasury |
2 देखि भानुकुलभूषनहि बिसरा सखिन्ह अपान।।233।।
सूर्यवंश के भूषण राम को देखकर सखियाँ अपने आपको भूल गईं।
English explanation
Seeing Rama, the ornament of the solar dynasty, the companions forgot themselves.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | on seeing |
| भानुकुलभूषनहि | सूर्यवंश के भूषण राम को | Rama, the ornament of the solar dynasty |
| बिसरा | भूल गया | was forgotten |
| सखिन्ह | सखियों को | by the female companions |
| अपान | अपना आप | their own selves |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 233
- स्रोत अभिलेख
- 1.233
- सहायक विषय
- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 228, 228
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