बालकाण्ड · दोहा 232 · दोहा/सोरठा
लताभवन तें प्रगट भे तेहि अवसर दोउ भाइ।
लताभवन तें प्रगट भे तेहि अवसर दोउ भाइ।
निकसे जनु जुग बिमल बिधु जलद पटल बिलगाइ।।232।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.232 · पुस्तक पृ. 227, 227
भावार्थ और शब्दार्थ
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1लताभवन तें प्रगट भे तेहि अवसर दोउ भाइ।
उसी समय दोनों भाई लताओं के मंडप से प्रकट हुए।
English explanation
At that moment, both brothers emerged from the bower of creepers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लताभवन | लताओं के मंडप | the bower of creepers |
| तें | से | from |
| प्रगट | दृश्य | visible |
| भे | हुए | became |
| तेहि | उसी | that very |
| अवसर | समय | moment |
| दोउ | दोनों | both |
| भाइ | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
2 निकसे जनु जुग बिमल बिधु जलद पटल बिलगाइ।।232।।
वे ऐसे निकले मानो दो निर्मल चंद्रमा बादलों का आवरण हटाकर निकल आए हों।
English explanation
They emerged as though two radiant, unclouded moons had parted the veil of clouds and appeared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निकसे | बाहर निकले | emerged |
| जनु | मानो | as though |
| जुग | दो; एक जोड़ी | two; a pair |
| बिमल | निर्मल | clear and radiant |
| बिधु | चंद्रमा | moons |
| जलद | बादलों का | of clouds |
| पटल | आवरण | veil |
| बिलगाइ | हटाकर | having parted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 232
- स्रोत अभिलेख
- 1.232
- सहायक विषय
- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 227, 227
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