बालकाण्ड · दोहा 231 · दोहा/सोरठा
करत बतकहि अनुज सन मन सिय रूप लोभान।
करत बतकहि अनुज सन मन सिय रूप लोभान।
मुख सरोज मकरंद छबि करइ मधुप इव पान।।231।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.231 · पुस्तक पृ. 226, 227
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1करत बतकहि अनुज सन मन सिय रूप लोभान।
राम छोटे भाई से बातचीत कर रहे हैं, पर उनका मन सीता के रूप पर मोहित है।
English explanation
Rama converses with his younger brother, while his heart is captivated by Sita’s beauty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करत | करते हुए | engaging in |
| बतकहि | बातचीत | conversation |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | his younger brother Lakshmana |
| सन | से | with |
| मन | मन | heart |
| सिय | सीता के | Sita’s |
| रूप | सौंदर्य पर | by beauty |
| लोभान | मोहित | captivated |
2 मुख सरोज मकरंद छबि करइ मधुप इव पान।।231।।
उनका मन भौंरे की तरह सीता के मुख-कमल की छबिरूपी मकरंद का पान कर रहा है।
English explanation
Like a bee, his heart drinks the nectar of beauty from Sita’s lotus-like face.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुख | सीता का मुख | Sita’s face |
| सरोज | कमल | lotus |
| मकरंद | पुष्परस | nectar |
| छबि | शोभा | beauty |
| करइ | करता है | does |
| मधुप | भौंरा | bee |
| इव | की तरह | like |
| पान | पान | drinking |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 231
- स्रोत अभिलेख
- 1.231
- सहायक विषय
- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 226, 227
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