बालकाण्ड · सोरठा 236 · सोरठा
जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे॥ २३६॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.236 · पुस्तक पृ. 230, 231
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
गौरी को अपने अनुकूल जानकर सीता के हृदय में जो हर्ष हुआ, वह कहा नहीं जा सकता।
English explanation
Knowing Gauri to be favorably disposed toward her, Sita felt a joy in her heart that cannot be expressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानि | जानकर | having understood |
| गौरि | गौरी; देवी पार्वती को | Gauri, the goddess Parvati |
| अनुकूल | अपने प्रति अनुकूल; प्रसन्न | favorably disposed toward her |
| सिय | सीता के | Sita’s |
| हिय | हृदय में | in the heart |
| हरषु | हर्ष; आनंद | joy |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| कहि | कहा; वर्णित | said; expressed |
2 मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे॥ २३६॥
शुभता के सूचक सुंदर बाएँ अंग फड़कने लगे।
English explanation
Her lovely left-side limbs began to twitch, indicating auspiciousness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंजुल | सुंदर; सुहावने | lovely; pleasing |
| मंगल | शुभता; कल्याण | auspiciousness; well-being |
| मूल | मूल; शुभता के सूचक | source; indicators of auspiciousness |
| बाम | बाएँ | left-side |
| अंग | अंग; शरीर के अवयव | limbs; parts of the body |
| फरकन | फड़कने | to twitch |
| लगे | लगे; आरंभ हुए | began |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- सोरठा 236
- स्रोत अभिलेख
- 1.236
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 230, 231
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