बालकाण्ड · दोहा 187 · दोहा/सोरठा
निज लोकहि बिरंचि गे देवन्ह इहइ सिखाइ।
निज लोकहि बिरंचि गे देवन्ह इहइ सिखाइ।
बानर तनु धरि धरि महि हरि पद सेवहु जाइ।।187।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.187 · पुस्तक पृ. 188, 189
भावार्थ और शब्दार्थ
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1निज लोकहि बिरंचि गे देवन्ह इहइ सिखाइ।
देवताओं को यह शिक्षा देकर ब्रह्मा अपने लोक चले गए।
English explanation
After giving the gods this instruction, Brahma went to his own realm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | his own |
| लोकहि | लोक को | to the realm |
| बिरंचि | ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| गे | चले गए | went |
| देवन्ह | देवताओं को | to the gods |
| इहइ | यही | this very instruction |
| सिखाइ | सिखाकर | having instructed |
2 बानर तनु धरि धरि महि हरि पद सेवहु जाइ।।187।।
वानर शरीर धारण करके पृथ्वी पर जाओ और भगवान के चरणों की सेवा करो।
English explanation
Assume monkey bodies, go to earth, and serve the Lord’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बानर | वानर का | monkey |
| तनु | शरीर | bodies |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| धरि | धारण करके, प्रत्येक अपने लिए | each assuming such a body |
| महि | पृथ्वी पर | on earth |
| हरि | भगवान के | of the Lord |
| पद | चरण | feet |
| सेवहु | सेवा करो | serve |
| जाइ | जाकर | having gone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 187
- स्रोत अभिलेख
- 1.187
- सहायक विषय
- भगवान्का वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 188, 189
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