बालकाण्ड · दोहा 188 · दोहा/सोरठा
कौसल्यादि नारि प्रिय सब आचरन पुनीत।
कौसल्यादि नारि प्रिय सब आचरन पुनीत।
पति अनुकूल प्रेम दृढ़ हरि पद कमल बिनीत।।188।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.188 · पुस्तक पृ. 189, 189
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कौसल्यादि नारि प्रिय सब आचरन पुनीत।
कौसल्या आदि उनकी सभी प्रिय रानियाँ पवित्र आचरण वाली थीं।
English explanation
All his beloved queens, beginning with Kausalya, were pure in conduct.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसल्यादि | कौसल्या आदि | Kausalya and the others |
| नारि | पत्नियाँ या रानियाँ | wives or queens |
| प्रिय | प्रिय | beloved |
| सब | सभी | all |
| आचरन | आचरण | conduct |
| पुनीत | पवित्र | pure |
2 पति अनुकूल प्रेम दृढ़ हरि पद कमल बिनीत।।188।।
वे पति के अनुकूल थीं, उनका प्रेम दृढ़ था और वे हरि के चरणकमलों में विनम्र थीं।
English explanation
They were devoted to their husband, steadfast in love, and humble before Hari's lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पति | पति के | to their husband |
| अनुकूल | अनुकूल | devoted and agreeable |
| प्रेम | प्रेम | love |
| दृढ़ | अटल | steadfast |
| हरि | भगवान हरि के | of Lord Hari |
| पद | चरण | feet |
| कमल | कमल-समान | lotus-like |
| बिनीत | विनम्र | humble |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 188
- स्रोत अभिलेख
- 1.188
- सहायक विषय
- भगवान्का वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 189, 189
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