बालकाण्ड · दोहा 189 · दोहा/सोरठा
तब अदृस्य भए पावक सकल सभहि समुझाइ।।
तब अदृस्य भए पावक सकल सभहि समुझाइ।।
परमानंद मगन नृप हरष न हृदयँ समाइ।।189।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.189 · पुस्तक पृ. 189, 190
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तब अदृस्य भए पावक सकल सभहि समुझाइ।।
तब अग्निदेव पूरी सभा को समझाकर अदृश्य हो गए।
English explanation
Then, having instructed the entire assembly, the fire god disappeared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| अदृस्य | अदृश्य | invisible |
| भए | हो गए | became |
| पावक | अग्निदेव | the fire god |
| सकल | पूरी | entire |
| सभहि | सभा को | assembly |
| समुझाइ | समझाकर | having instructed |
2 परमानंद मगन नृप हरष न हृदयँ समाइ।।189।।
राजा परम आनंद में मग्न थे; उनका हर्ष हृदय में समाता न था।
English explanation
The king was immersed in supreme joy; his heart could not contain his delight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परमानंद | परम आनंद में | in supreme joy |
| मगन | मग्न | immersed |
| नृप | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| हरष | हर्ष | delight |
| न | नहीं | not |
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| समाइ | समाता था | could be contained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 189
- स्रोत अभिलेख
- 1.189
- सहायक विषय
- भगवान्का वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 189, 190
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