बालकाण्ड · दोहा 186 · दोहा
जानि सभय सुर भूमि सुनि बचन समेत सनेह।
जानि सभय सुर भूमि सुनि बचन समेत सनेह।
गगनगिरा गंभीर भइ हरनि सोक संदेह॥ १८६॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.186 · पुस्तक पृ. 186, 188
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1जानि सभय सुर भूमि सुनि बचन समेत सनेह।
एआई-प्रारूप अर्थ: देवताओं और पृथ्वी को भयभीत जानकर तथा उनके स्नेहपूर्ण वचन सुनकर—
English explanation
AI-draft meaning: Knowing the gods and the Earth to be afraid, and hearing their affectionate words—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानि | जानकर | knowing |
| सभय | भयभीत | afraid |
| सुर | देवताओं को | the gods |
| भूमि | पृथ्वी को | the Earth |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| बचन | वचन | words |
| समेत | से युक्त | filled with |
| सनेह | स्नेह | affection |
2गगनगिरा गंभीर भइ हरनि सोक संदेह॥ १८६॥
एआई-प्रारूप अर्थ: शोक और संदेह दूर करने वाली गंभीर आकाशवाणी हुई।
English explanation
AI-draft meaning: A deep, solemn voice from the sky arose, dispelling sorrow and doubt.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गगनगिरा | आकाशवाणी | a voice from the sky |
| गंभीर | गंभीर, गूँजती हुई | deep and solemn |
| भइ | हुई | arose |
| हरनि | दूर करने वाली | dispelling |
| सोक | शोक | sorrow |
| संदेह | संदेह | doubt |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 186
- स्रोत अभिलेख
- 1.186
- सहायक विषय
- पृथ्वी और देवतादिकी करुण पुकार
- मुद्रित पृष्ठ
- 186, 188
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।