बालकाण्ड · दोहा 349 · दोहा/सोरठा
निगम नीति कुल रीति करि अरघ पाँवड़े देत।
निगम नीति कुल रीति करि अरघ पाँवड़े देत।
बधुन्ह सहित सुत परिछि सब चलीं लवाइ निकेत।।349।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.349 · पुस्तक पृ. 330, 331
भावार्थ और शब्दार्थ
1निगम नीति कुल रीति करि अरघ पाँवड़े देत।
वेद-विहित विधि और कुल की रीति निभाकर माताएँ अर्घ्य देती हैं और पाँवड़े बिछाती हैं।
English explanation
Observing Vedic procedure and family custom, the mothers offer ceremonial water and lay cloths along the path for their feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निगम | वेदों की | of the Vedas |
| नीति | विहित विधि | prescribed procedure |
| कुल | परिवार की | of the family |
| रीति | परंपरा | custom |
| करि | पालन करके | having observed |
| अरघ | पूजनार्थ अर्घ्य-जल | ceremonial water offering |
| पाँवड़े | पाँव रखने के लिए बिछाए वस्त्र | cloths spread for the feet to tread on |
| देत | देती हैं; बिछाती हैं | offer; lay out |
2 बधुन्ह सहित सुत परिछि सब चलीं लवाइ निकेत।।349।।
सभी पुत्रों को उनकी वधुओं सहित परिछन करके माताएँ उन्हें घर के भीतर ले चलीं।
English explanation
After performing the welcoming ritual for all the sons and their brides, the mothers led them into the house.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बधुन्ह | वधुओं के | the brides |
| सहित | साथ | with |
| सुत | पुत्रों का | the sons |
| परिछि | परिछन करके | having performed the welcoming ritual |
| सब | सभी का | all of them |
| चलीं | चल पड़ीं | set off |
| लवाइ | साथ ले जाकर | leading them along |
| निकेत | घर में | into the house |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 349
- स्रोत अभिलेख
- 1.349
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 330, 331
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।