बालकाण्ड · दोहा 348 · दोहा/सोरठा
एहि बिधि सबही देत सुखु आए राजदुआर।
एहि बिधि सबही देत सुखु आए राजदुआर।
मुदित मातु परुछनि करहिं बधुन्ह समेत कुमार।।348।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.348 · पुस्तक पृ. 329, 330
भावार्थ और शब्दार्थ
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1एहि बिधि सबही देत सुखु आए राजदुआर।
इस प्रकार सबको सुख देते हुए वे राजमहल के द्वार पर आए।
English explanation
In this way, bringing happiness to everyone, they arrived at the palace gate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | way |
| सबही | सभी को | to everyone |
| देत | देते हुए | giving |
| सुखु | सुख | happiness |
| आए | आए | arrived |
| राजदुआर | राजमहल के द्वार पर | at the palace gate |
2 मुदित मातु परुछनि करहिं बधुन्ह समेत कुमार।।348।।
प्रसन्न माताएँ वधुओं सहित राजकुमारों का मंगल-परिछन करती हैं।
English explanation
The joyful mothers perform the auspicious welcoming rite for the princes together with their brides.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| मातु | माताएँ | mothers |
| परुछनि | मंगल-परिछन, स्वागत का अनुष्ठान | auspicious welcoming rite |
| करहिं | करती हैं | perform |
| बधुन्ह | वधुओं के | the brides |
| समेत | सहित | together with |
| कुमार | राजकुमारों का | for the princes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 348
- स्रोत अभिलेख
- 1.348
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 329, 330
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