बालकाण्ड · दोहा 350 (क) · दोहा/सोरठा
एहि सुख ते सत कोटि गुन पावहिं मातु अनंदु।।
एहि सुख ते सत कोटि गुन पावहिं मातु अनंदु।।
भाइन्ह सहित बिआहि घर आए रघुकुलचंदु।।350(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.35 · पुस्तक पृ. 331, 332
भावार्थ और शब्दार्थ
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1एहि सुख ते सत कोटि गुन पावहिं मातु अनंदु।।
इन सुखों से सौ करोड़ गुना आनंद माताएँ पाती हैं।
English explanation
The mothers experience a billion times more joy than these pleasures.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इन | these |
| सुख | सुखों | pleasures |
| ते | से | than |
| सत | सौ | one hundred |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| गुन | गुना | times |
| पावहिं | पाती हैं | experience |
| मातु | माताएँ | the mothers |
| अनंदु | आनंद | joy |
2 भाइन्ह सहित बिआहि घर आए रघुकुलचंदु।।350(क)।।
रघुकुल के चंद्रमा श्रीराम भाइयों सहित विवाह करके घर आए हैं।
English explanation
Rama, the moon of Raghu’s lineage, has returned home after marrying, together with his brothers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाइन्ह | भाइयों के | his brothers |
| सहित | साथ | together with |
| बिआहि | विवाह करके | having married |
| घर | घर | home |
| आए | आए हैं | have returned |
| रघुकुलचंदु | रघुकुल के चंद्रमा श्रीराम | Rama, the moon of Raghu’s lineage |
| क | पद्य-संदर्भ का चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 350 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 1.35
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 331, 332
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