बालकाण्ड · दोहा 350 (ख) · दोहा/सोरठा
लोक रीत जननी करहिं बर दुलहिनि सकुचाहिं।
लोक रीत जननी करहिं बर दुलहिनि सकुचाहिं।
मोदु बिनोदु बिलोकि बड़ रामु मनहिं मुसकाहिं।।350(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.35 · पुस्तक पृ. 331, 332
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 लोक रीत जननी करहिं बर दुलहिनि सकुचाहिं।
माताएँ लोकाचार की रस्में करती हैं; दूल्हे और दुलहिनें संकोच करते हैं।
English explanation
The mothers perform customary rites; the bridegrooms and brides feel shy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोक | समाज की | of the community |
| रीत | प्रचलित रीति | customary rites |
| जननी | माताएँ | the mothers |
| करहिं | करती हैं | perform |
| बर | दूल्हे | the bridegrooms |
| दुलहिनि | दुलहिनें | the brides |
| सकुचाहिं | संकोच करते हैं | feel shy |
2 मोदु बिनोदु बिलोकि बड़ रामु मनहिं मुसकाहिं।।350(ख)।।
इस बड़े आनंद और हँसी-विनोद को देखकर श्रीराम मन ही मन मुसकराते हैं।
English explanation
Seeing this great joy and merriment, Rama smiles inwardly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोदु | आनंद | joy |
| बिनोदु | हँसी-विनोद | merriment |
| बिलोकि | देखकर | seeing |
| बड़ | बहुत बड़ा | great |
| रामु | श्रीराम | Rama |
| मनहिं | मन ही मन | inwardly |
| मुसकाहिं | मुसकराते हैं | smiles |
| ख | पद्य-संदर्भ का चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 350 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 1.35
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 331, 332
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