बालकाण्ड · दोहा 351 · दोहा/सोरठा
देंहिं असीस जोहारि सब गावहिं गुन गन गाथ।
देंहिं असीस जोहारि सब गावहिं गुन गन गाथ।
तब गुर भूसुर सहित गृहँ गवनु कीन्ह नरनाथ।।351।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.351 · पुस्तक पृ. 332, 333
भावार्थ और शब्दार्थ
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1देंहिं असीस जोहारि सब गावहिं गुन गन गाथ।
सब प्रणाम करके आशीर्वाद देते हैं और अनेक गुणों की गाथाएँ गाते हैं।
English explanation
All bow in respect, offer blessings, and sing accounts of his many virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देंहिं | देते हैं | give |
| असीस | आशीर्वाद | blessings |
| जोहारि | प्रणाम करके | bowing respectfully |
| सब | सभी | all |
| गावहिं | गाते हैं | sing |
| गुन | गुणों की | of virtues |
| गन | समूह, अनेक | the multitude |
| गाथ | गाथाएँ | praises and accounts |
2 तब गुर भूसुर सहित गृहँ गवनु कीन्ह नरनाथ।।351।।
तब राजा दशरथ गुरु और ब्राह्मणों सहित अपने गृह को गए।
English explanation
Then King Dasharatha went home with his preceptor and the Brahmins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| गुर | गुरु वसिष्ठ | the preceptor Vashishtha |
| भूसुर | ब्राह्मणों | the Brahmins |
| सहित | के साथ | together with |
| गृहँ | गृह को | homeward |
| गवनु | गमन | departure, going |
| कीन्ह | किया | made |
| नरनाथ | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 351
- स्रोत अभिलेख
- 1.351
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 332, 333
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