बालकाण्ड · दोहा 193 · दोहा/सोरठा
नंदीमुख सराध करि जातकरम सब कीन्ह।
नंदीमुख सराध करि जातकरम सब कीन्ह।
हाटक धेनु बसन मनि नृप बिप्रन्ह कहँ दीन्ह।।193।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.193 · पुस्तक पृ. 193, 194
भावार्थ और शब्दार्थ
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1नंदीमुख सराध करि जातकरम सब कीन्ह।
नांदीमुख श्राद्ध करके राजा ने जातकर्म आदि सभी जन्म-संस्कार किए।
English explanation
After performing the auspicious ancestral rite, the king carried out the birth ceremony and all the associated rites.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नंदीमुख | मंगल कार्य से पहले पितरों के निमित्त किया जाने वाला | auspicious, performed for the ancestors before a happy occasion |
| सराध | श्राद्ध | ancestral offering rite |
| करि | करके | having performed |
| जातकरम | जन्म पर किया जाने वाला जातकर्म संस्कार | the birth rite for a newborn |
| सब | सभी | all |
| कीन्ह | किए | performed |
2 हाटक धेनु बसन मनि नृप बिप्रन्ह कहँ दीन्ह।।193।।
राजा ने ब्राह्मणों को सोना, गायें, वस्त्र और रत्न दिए।
English explanation
The king gave gold, cows, garments, and gems to the Brahmins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हाटक | सोना | gold |
| धेनु | गायें | cows |
| बसन | वस्त्र | garments |
| मनि | रत्न | gems |
| नृप | राजा ने | the king |
| बिप्रन्ह | ब्राह्मणों | the Brahmins |
| कहँ | को | to |
| दीन्ह | दिए | gave |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 193
- स्रोत अभिलेख
- 1.193
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 193, 194
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