बालकाण्ड · दोहा 194 · दोहा/सोरठा
गृह गृह बाज बधाव सुभ प्रगटे सुषमा कंद।
गृह गृह बाज बधाव सुभ प्रगटे सुषमा कंद।
हरषवंत सब जहँ तहँ नगर नारि नर बृंद।।194।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.194 · पुस्तक पृ. 194, 195
भावार्थ और शब्दार्थ
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1गृह गृह बाज बधाव सुभ प्रगटे सुषमा कंद।
घर-घर शुभ बधाई के गीत और वाद्य बज रहे हैं, क्योंकि सौंदर्य के मूल स्रोत राम प्रकट हुए हैं।
English explanation
Auspicious celebratory songs and music resound in every home, for Rama, the very source of beauty, has appeared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गृह | घर | home |
| गृह | घर; प्रत्येक घर में | after home; in every home |
| बाज | बज रहे हैं | resound |
| बधाव | बधाई के गीत और वाद्य | celebratory songs and music |
| सुभ | शुभ | auspicious |
| प्रगटे | प्रकट हुए; जन्मे | appeared; were born |
| सुषमा | सुंदरता के | of beauty |
| कंद | मूल स्रोत | the root source |
2 हरषवंत सब जहँ तहँ नगर नारि नर बृंद।।194।।
नगर में जहाँ-तहाँ स्त्रियों और पुरुषों के सभी समूह आनंद से भरे हुए हैं।
English explanation
Everywhere in the city, all the groups of women and men are filled with joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषवंत | आनंदित; हर्ष से भरे | filled with joy |
| सब | सभी | all |
| जहँ | जहाँ | where |
| तहँ | वहाँ; जहाँ-तहाँ | there; everywhere |
| नगर | नगर के; नगर में | of the city; in the city |
| नारि | स्त्रियों के | of women |
| नर | पुरुषों के | of men |
| बृंद | समूह | groups |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 194
- स्रोत अभिलेख
- 1.194
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 194, 195
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।