बालकाण्ड · दोहा 195 · दोहा/सोरठा
मास दिवस कर दिवस भा मरम न जानइ कोइ।
मास दिवस कर दिवस भा मरम न जानइ कोइ।
रथ समेत रबि थाकेउ निसा कवन बिधि होइ।।195।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.195 · पुस्तक पृ. 195, 195
भावार्थ और शब्दार्थ
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1मास दिवस कर दिवस भा मरम न जानइ कोइ।
एक महीने के दिनों का एक ही दिन हो गया; इसका रहस्य कोई नहीं जानता।
English explanation
A month’s worth of days became a single day; no one knows its mystery.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मास | एक महीने के | a month’s |
| दिवस | दिनों | days |
| कर | का | of |
| दिवस | एक दिन | a single day |
| भा | हो गया | became |
| मरम | रहस्य | mystery |
| न | नहीं | not |
| जानइ | जानता है | knows |
| कोइ | कोई | anyone |
2 रथ समेत रबि थाकेउ निसा कवन बिधि होइ।।195।।
सूर्य अपने रथ सहित ठहर गया; फिर रात किस तरह हो सकती थी?
English explanation
The sun stood still with his chariot; how, then, could night occur?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रथ | रथ | chariot |
| समेत | सहित | together with |
| रबि | सूर्य | the sun |
| थाकेउ | ठहर गया | came to a standstill |
| निसा | रात | night |
| कवन | किस | what |
| बिधि | तरह | way |
| होइ | हो सकती है | could occur |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 195
- स्रोत अभिलेख
- 1.195
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 195, 195
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।