बालकाण्ड · दोहा 192 · दोहा
बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।
बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।
निज इच्छा निॢमत तनु माया गुन गो पार॥ १९२॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.192 · पुस्तक पृ. 192, 193
भावार्थ और शब्दार्थ
1बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।
एआई-प्रारूप: ब्राह्मणों, गायों, देवताओं और संतों के हित के लिए प्रभु ने मनुष्य का अवतार लिया।
English explanation
AI draft: The Lord took human form for the welfare of Brahmins, cows, gods, and saints.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्र | ब्राह्मण | Brahmins |
| धेनु | गाएँ | cows |
| सुर | देवता | gods |
| संत | संतजन | saints |
| हित | के कल्याण के लिए | for the welfare of |
| लीन्ह | लिया | took |
| मनुज | मनुष्य के रूप में | in human form |
| अवतार | अवतार | incarnation |
2निज इच्छा निॢमत तनु माया गुन गो पार॥ १९२॥
उनका शरीर अपनी ही इच्छा से निर्मित है; वे माया, गुणों और इंद्रियों की पहुँच से परे हैं।
English explanation
His body is formed by his own will; he is beyond maya, the qualities of nature, and the reach of the senses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपनी ही | his own |
| इच्छा | इच्छा से | by will |
| निॢमत | निर्मित किया हुआ | formed |
| तनु | शरीर | body |
| माया | माया | maya, the power of phenomenal appearance |
| गुन | प्रकृति के गुण | the qualities of nature |
| गो | इंद्रियाँ | the senses |
| पार | से परे | beyond |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 192
- स्रोत अभिलेख
- 1.192
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 192, 193
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।