बालकाण्ड · दोहा 285 · दोहा/सोरठा
देवन्ह दीन्हीं दुंदुभीं प्रभु पर बरषहिं फूल।
देवन्ह दीन्हीं दुंदुभीं प्रभु पर बरषहिं फूल।
हरषे पुर नर नारि सब मिटी मोहमय सूल।।285।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.285 · पुस्तक पृ. 271, 272
भावार्थ और शब्दार्थ
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1देवन्ह दीन्हीं दुंदुभीं प्रभु पर बरषहिं फूल।
देवताओं ने दुंदुभियाँ बजाईं और वे प्रभु राम पर फूल बरसा रहे हैं।
English explanation
The gods sounded kettledrums and shower flowers upon Lord Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देवन्ह | देवताओं ने | the gods |
| दीन्हीं | बजाईं | sounded |
| दुंदुभीं | दुंदुभियाँ; नगाड़े | kettledrums |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| पर | पर | upon |
| बरषहिं | बरसाते हैं | shower |
| फूल | फूल | flowers |
2 हरषे पुर नर नारि सब मिटी मोहमय सूल।।285।।
नगर के सभी पुरुष और स्त्रियाँ हर्षित हुए; मोह से उत्पन्न पीड़ा मिट गई।
English explanation
All the men and women of the city rejoiced; the anguish born of delusion disappeared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषे | हर्षित हुए | rejoiced |
| पुर | नगर के | of the city |
| नर | पुरुष | men |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| सब | सभी | all |
| मिटी | मिट गई | disappeared |
| मोहमय | मोह से भरी; मोहजनित | imbued with or born of delusion |
| सूल | पीड़ा; चुभन | pain; anguish |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 285
- स्रोत अभिलेख
- 1.285
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 271, 272
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