बालकाण्ड · दोहा 284 · दोहा/सोरठा
जाना राम प्रभाउ तब पुलक प्रफुल्लित गात।
जाना राम प्रभाउ तब पुलक प्रफुल्लित गात।
जोरि पानि बोले बचन ह्दयँ न प्रेमु अमात।।284।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.284 · पुस्तक पृ. 270, 271
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जाना राम प्रभाउ तब पुलक प्रफुल्लित गात।
तब परशुराम ने राम का प्रताप पहचान लिया; उनका शरीर रोमांचित और हर्ष से खिल उठा।
English explanation
Then Parashurama recognized Rama’s power; his body thrilled and blossomed with joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाना | पहचान लिया | recognized |
| राम | राम का | Rama’s |
| प्रभाउ | प्रताप; सामर्थ्य | power; might |
| तब | तब | then |
| पुलक | रोमांचित | thrilling with hair standing on end |
| प्रफुल्लित | हर्ष से खिल उठा | blossoming with joy |
| गात | शरीर | body |
2 जोरि पानि बोले बचन ह्दयँ न प्रेमु अमात।।284।।
हाथ जोड़कर वे वचन बोले; उनके हृदय में प्रेम समा नहीं रहा था।
English explanation
With hands joined, he spoke; his heart could scarcely contain his love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोरि | जोड़कर | joining |
| पानि | हाथ | hands |
| बोले | वे बोले | he spoke |
| बचन | वचन | words |
| ह्दयँ | हृदय में | in the heart |
| न | नहीं | not |
| प्रेमु | प्रेम | love |
| अमात | समाता था | could be contained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 284
- स्रोत अभिलेख
- 1.284
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 270, 271
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।