बालकाण्ड · दोहा 283 · दोहा/सोरठा
जौं हम निदरहिं बिप्र बदि सत्य सुनहु भृगुनाथ।
जौं हम निदरहिं बिप्र बदि सत्य सुनहु भृगुनाथ।
तौ अस को जग सुभटु जेहि भय बस नावहिं माथ।।283।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.283 · पुस्तक पृ. 270, 270
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जौं हम निदरहिं बिप्र बदि सत्य सुनहु भृगुनाथ।
यदि हम ब्राह्मण कहकर आपका अनादर करते हों, तो हे भृगुनाथ, सत्य सुनिए—
English explanation
If we were to slight you by calling you a Brahmin, then hear the truth, O lord of Bhrigu’s line—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| हम | हम | we |
| निदरहिं | अनादर करें | should slight |
| बिप्र | ब्राह्मण | a Brahmin |
| बदि | कहकर | calling you |
| सत्य | सच्ची बात | the truth |
| सुनहु | सुनिए | listen |
| भृगुनाथ | हे भृगुवंश के श्रेष्ठ परशुराम | O Parashurama, lord of Bhrigu’s line |
2 तौ अस को जग सुभटु जेहि भय बस नावहिं माथ।।283।।
तो संसार में ऐसा कौन योद्धा है जिसके भय से हम सिर झुकाएँ?
English explanation
Then what warrior is there in the world before whom we would bow our heads out of fear?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तौ | तो | then |
| अस | ऐसा | such |
| को | कौन | who |
| जग | संसार में | in the world |
| सुभटु | वीर योद्धा | mighty warrior |
| जेहि | जिसके | of whom |
| भय | भय | fear |
| बस | के वश में | under the sway of |
| नावहिं | हम झुकाएँ | we would bow |
| माथ | सिर | our heads |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 283
- स्रोत अभिलेख
- 1.283
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 270, 270
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