बालकाण्ड · दोहा 286 · दोहा/सोरठा
तदपि जाइ तुम्ह करहु अब जथा बंस ब्यवहारु।
तदपि जाइ तुम्ह करहु अब जथा बंस ब्यवहारु।
बूझि बिप्र कुलबृद्ध गुर बेद बिदित आचारु।।286।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.286 · पुस्तक पृ. 272, 273
भावार्थ और शब्दार्थ
1तदपि जाइ तुम्ह करहु अब जथा बंस ब्यवहारु।
‘फिर भी अब तुम जाकर अपने वंश की रीति के अनुसार विवाह के व्यवहार करो।’
English explanation
‘Nevertheless, now go and carry out the wedding observances according to your lineage’s customs.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| जाइ | जाकर | go and |
| तुम्ह | तुम; राजा जनक | you; King Janaka |
| करहु | करो | carry out |
| अब | अब | now |
| जथा | के अनुसार | according to |
| बंस | वंश; कुल | lineage; family |
| ब्यवहारु | विवाह-संबंधी रीति-व्यवहार | customary wedding observances |
2 बूझि बिप्र कुलबृद्ध गुर बेद बिदित आचारु।।286।।
‘ब्राह्मणों, कुल के वृद्धों और गुरु से पूछकर वेदों में बताए हुए आचार का पालन करो।’
English explanation
‘Consult the Brahmins, family elders, and preceptor, and follow the observances prescribed in the Vedas.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बूझि | पूछकर; परामर्श करके | after consulting |
| बिप्र | ब्राह्मणों से | the Brahmins |
| कुलबृद्ध | कुल के वृद्धों से | the family elders |
| गुर | गुरु से | the preceptor |
| बेद | वेदों में | in the Vedas |
| बिदित | बताए हुए; प्रतिपादित | set forth; prescribed |
| आचारु | आचार; विधि-विधान | observances; prescribed rites |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 286
- स्रोत अभिलेख
- 1.286
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 272, 273
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।