बालकाण्ड · दोहा 257 · दोहा/सोरठा
देखि देखि रघुबीर तन सुर मनाव धरि धीर।।
देखि देखि रघुबीर तन सुर मनाव धरि धीर।।
भरे बिलोचन प्रेम जल पुलकावली सरीर।।257।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.257 · पुस्तक पृ. 249, 249
भावार्थ और शब्दार्थ
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1देखि देखि रघुबीर तन सुर मनाव धरि धीर।।
रघुवीर राम के शरीर को बार-बार देखकर सीता धैर्य धारण कर देवताओं से प्रार्थना करती हैं।
English explanation
Looking repeatedly at Rama's form, Sita gathers composure and prays to the gods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | looking |
| देखि | बार-बार देखकर | again and again |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम का | of Rama, hero of Raghu's lineage |
| तन | शरीर | form |
| सुर | देवताओं को | the gods |
| मनाव | प्रार्थना करके मनाती हैं | seeks to propitiate |
| धरि | धारण करके | gathering |
| धीर | धैर्य | composure |
2 भरे बिलोचन प्रेम जल पुलकावली सरीर।।257।।
सीता के नेत्र प्रेम के आँसुओं से भर गए और शरीर में रोमांच छा गया।
English explanation
Sita's eyes filled with tears of love, and her body was covered with goosebumps.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरे | भर गए | filled |
| बिलोचन | नेत्र | eyes |
| प्रेम | प्रेम का | of love |
| जल | जल अर्थात आँसू | water, meaning tears |
| पुलकावली | रोमांच की पंक्तियाँ | rows of goosebumps |
| सरीर | शरीर में | on her body |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 257
- स्रोत अभिलेख
- 1.257
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 249, 249
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