बालकाण्ड · दोहा 250 · दोहा/सोरठा
तमकि धरहिं धनु मूढ़ नृप उठइ न चलहिं लजाइ।
तमकि धरहिं धनु मूढ़ नृप उठइ न चलहिं लजाइ।
मनहुँ पाइ भट बाहुबलु अधिकु अधिकु गरुआइ।।250।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.25 · पुस्तक पृ. 243, 244
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तमकि धरहिं धनु मूढ़ नृप उठइ न चलहिं लजाइ।
मूर्ख राजा जोश में तनकर धनुष पकड़ते हैं; वह उठता नहीं, तो वे लज्जित होकर चले जाते हैं।
English explanation
The foolish kings brace themselves and seize the bow; when it does not rise, they depart in shame.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तमकि | जोश में तनकर | bracing themselves spiritedly |
| धरहिं | पकड़ते हैं | grasp |
| धनु | धनुष | the bow |
| मूढ़ | मूर्ख | foolish |
| नृप | राजा | kings |
| उठइ | उठता है | rises |
| न | नहीं | not |
| चलहिं | चले जाते हैं | depart |
| लजाइ | लज्जित होकर | ashamed |
2 मनहुँ पाइ भट बाहुबलु अधिकु अधिकु गरुआइ।।250।।
मानो योद्धाओं का बाहुबल पाकर धनुष और अधिक, और अधिक भारी होता जाता हो।
English explanation
It is as though, receiving the warriors’ arm-strength, the bow grows heavier and heavier.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनहुँ | मानो | as though |
| पाइ | पाकर | having received |
| भट | योद्धाओं का | of the warriors |
| बाहुबलु | भुजाओं का बल | arm-strength |
| अधिकु | और अधिक | more |
| अधिकु | और अधिक | still more |
| गरुआइ | भारी होता जाता है | grows heavier |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 250
- स्रोत अभिलेख
- 1.25
- सहायक विषय
- बन्दीजनोंद्वारा जनकप्रतिज्ञाकी घोषणा
- मुद्रित पृष्ठ
- 243, 244
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