बालकाण्ड · दोहा 251 · दोहा/सोरठा
कुअँरि मनोहर बिजय बड़ि कीरति अति कमनीय।
कुअँरि मनोहर बिजय बड़ि कीरति अति कमनीय।
पावनिहार बिरंचि जनु रचेउ न धनु दमनीय।।251।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.251 · पुस्तक पृ. 244, 245
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कुअँरि मनोहर बिजय बड़ि कीरति अति कमनीय।
मनोहर राजकुमारी, विजय और बड़ी कीर्ति अत्यंत वांछनीय हैं।
English explanation
The beautiful princess, victory, and great renown are deeply desirable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुअँरि | राजकुमारी सीता | the princess, Sita |
| मनोहर | सुंदर; मन को मोहने वाली | beautiful; captivating |
| बिजय | विजय | victory |
| बड़ि | बड़ी | great |
| कीरति | कीर्ति; यश | fame; renown |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| कमनीय | चाहने योग्य; आकर्षक | desirable; attractive |
2 पावनिहार बिरंचि जनु रचेउ न धनु दमनीय।।251।।
मानो ब्रह्मा ने इन्हें पाने वाला, अर्थात धनुष को वश में करने वाला, कोई रचा ही नहीं।
English explanation
It seems Brahma has created no one to attain these rewards—no one capable of mastering the bow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पावनिहार | पाने वाला | one who would obtain them |
| बिरंचि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने | Brahma, the creator |
| जनु | मानो | as though |
| रचेउ | रचा; बनाया | created |
| न | नहीं | not |
| धनु | धनुष को | the bow |
| दमनीय | वश में करने वाला | one capable of mastering |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 251
- स्रोत अभिलेख
- 1.251
- सहायक विषय
- राजाओंसे धनुष न उठना, जनककी निराशाजनक वाणी
- मुद्रित पृष्ठ
- 244, 245
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